Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex


“Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”. मेरा नाम अनुप्रिया हैऔर मैं लखनऊ सहर की रहने वाली हूँ ये बात आज से 3 साल पहले की है सोचा आज मैं इसकहानी को ऑनलाइन हिंदी सेक्स स्टोरी – Blogtipsy.com जैसे Popular साईट पे पोस्टकर दूँ. तो चलिए और ज्यादा समय ना लेते हुए सीधे कहानी पर आती हूँ. जब मैंने आफिसज्‍वाइन ही किया था, तभी साहिल नाम का एक और लड़का भी इसी आफिस में मेरी तरह ही नया नया लगा था। उससे मेरी कुछ बातचीत होने लगी। उसको मैंने पापा के बारे में नहीं बताया था। धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ने लगी। वो हमारे शहर में एक किराये का मकान लेकर रहता था। हम दोस्त ज़रूर बने मगर हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं था जिससे कोई कुछ कह सकता। हमारा मिलना जुलना और लंच भी बस आफिस तक ही था।

साहिल एक मिडिल क्‍लास परिवार से था, वो बहुत ही मेहनती था और कुछ ही समय में वो कंपनी में उच्‍च पद पर आ गया। जब मेरे पापा सेवानिवृत्‍त हुए तब उसे पता लगा कि मैं उनकी बेटी हूँ। पर मैंने उसको अहसास दिलाया कि मेरे लिये हमारी दोस्‍ती ज्‍यादा मायने रखती है हमारी पारिवारिक पृष्‍ठ भूमि नहीं। 
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एक दिन मैंने उसको छेड़ते हुए कहा कि मेरे पिताजी ने मेरे लिया एक लड़का पसन्‍द किया है पर मुझे पता नहीं कि वो मेरे बारे में क्‍या सोचता है।
उसने कहा- कोई महामूर्ख होगा जो तुम जैसी खूबसूरत लड़की को ना करेगा।
उसने मुझसे कहा- तुम मुझे उसका नाम बताओ, मैं उसके बारे में पता लगाने की कोशिश करता हूँ।
मैंने कहा- अगर काम बनता हुआ तो भी नहीं बनेगा, वो यह सोचेगा कि तुम मेरे बहुत नज़दीक हो और वो बिदक जाएगा।
यह सुनकर उसने कहा- बात तो तुम सही कह रही हो।

फिर वो बोला- मेरी भी किस्मत देखो, जिसे मैं चाहता हूँ वो किसी और को चाहती है।
मैंने पूछा- कौन है वो खुशनसीब, जिसको तुम चाहते हो?
वो बोला- छोड़ो, अब बताना भी ठीक नहीं होगा। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

अगले दिन वो आफिस में नहीं आया मगर मेरी टेबल पर एक लिफ़ाफ़ा पड़ा था जिस पर मेरा नाम लिखा था। उसे खोलकर देखा तो उसमें बस दो लाइन ही लिखी हुई थी- अनुप्रिया जी, मैं आपको चाहता था मगर जब मुझे पता लगा कि आप किसी और की होने वाली हैं तो मैं कैसे आपको बताता। क्योंकि आपने मुझे यह पूछा है, सिर्फ इसलिये मुझे यह सब मजबूरी में लिखना पड़ रहा है।
पढ़कर मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा, मैंने उसी समय उसको फोन किया और बोली- इतने दिन तक क्यों तरसाया मुझे?
उसने कहा- मैं डरता था कि कहीं तुम्हारे घर वाले मुझे अपने परिवार का हिस्सा ना बनाना चाहें।
मैंने भावुक होकर फोन काट दिया। 
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अगले दिन वो आफिस आया तो सब गिले शिकवे खत्‍म हो चुके थे। मैंने उससे आफिस के बाद कहीं एकांत में बैठकर खुलकर बात करने का ऑफर दिया।

आफिस के बाद हम पास के ही एक रेस्टोरेंट में चले गये और वहाँ बैठ कर मैंने उससे पूछा- तुम्हारे घर वाले मुझे दिल से अपना मानेंगे ना?
उसने कहा- इस बात की तुम चिंता ना करो, बस अपने घर वालों को यही बात मेरे बारे में पूछो।
उससे मैंने कहा- तुम अभी चलो मेरे घर पर … सब कुछ तुम्हारे सामने ही बोलूंगी, तुम्हें पता लग जाएगा। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.
मेरी बात सुनकर वो भी मेरे साथ मेरे घर आ गया।

मेरे पापा ने ही दरवाजा खोला और उसे देखकर पूछा- हेल्‍लो साहिल, कैसे हो? तुम्हारी अगली प्रमोशन हो गई या नहीं? मैं तो पूरी सिफारिश करके आया था।
उसने पूरे अदब से जवाब दिया और बोला- सर, आपकी मेहरबानी है. वो तो बहुत दिन पहले ही हो चुकी है। मैं तो आपके घर अनुप्रिया का हाथ मांगने आया हूं। 
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पापा ने भी खुशी जाहिर करते हुए तुरन्‍त आवाज लगाकर मां को बुलाया।
आखिर में साहिल के माता पिता की सहमति मिलने के बाद हम दोनों का रिश्‍ता पक्‍का हो ही गया।

अब साहिल जो मुझसे हमेशा दूरी बनाकर रखता था मेरे बहुत ही करीब आने लगा। जब भी हम लोग अकेले होते थे वो मेरे गालों को चूम लेता। धीरे धीरे गालों से अब वो मेरे होंठों को भी चूमने लगा। मैं भी उसका उसी तरह से जवाब देती। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

एक दिन उसने मेरे मम्मों को कपड़ों के ऊपर से दबा दिया। जब मैंने कुछ विरोध किया तो “क्या करूँ अब ये बेईमान दिल नहीं मानता।” कहते हुए उसने अबकी बार मेरे उभारों को पूरी तरह से सहलाना शुरू कर दिया।
मैंने नारी सुलभ लज्‍जा दिखाते हुए उससे कहा- ये सब ठीक नहीं है, जो करना हो, शादी के बाद करना।
जवाब मिला- शादी में तो अभी एक महीना पड़ा है, तब तक कुछ तो करने की इजाजत दे दो।

मेरा मन भी तो उसकी बांहों में जाने को बेचैन था पर मैंने कुछ संयम बरतते हुए उसको बिना मेरे कपड़े उतारे छेड़छाड़ की इजाजत दे दी। अब उसने बिना कपड़े उतारे ही अपना हाथ मेरी शर्ट के अंदर डालकर मेरे मम्मों को दबाना शुरू कर दिया और मेरे निप्‍पल से खेलने लगा। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

अब मुझे भी बेचैनी होने लगी तो मैंने उसका हाथ निकालने की कोशिश की। अबकी बार उसने मेरी पेंटी के अंदर हाथ डालकर मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।
मैंने उससे कहा- तुम वकीलों की तरह से मेरे शब्दों को ना लो वरना मैं तुमसे शादी से पहले मिलना ही बंद कर दूँगी। तुम जानते हो कि जब मैंने तुमसे कहा था ‘कपड़ों को उतारे बिना’ तो इसका मतलब यह नहीं था कि तुम अपना हाथ कपड़ों के अंदर डालकर जो चाहो करो।
उसने सहम कर कहा- अच्छा बाबा, अब नहीं करूँगा। मगर कपड़ों के ऊपर से तो इज़ाज़त है ना?

इसी तरह से हम लोग एक दूसरे से मिलते वो मेरे बूब्स को कपड़ों के ऊपर से ही दबाता रहा और कई बार टाँगों के बीच भी सहला देता तो मुझे अच्‍छा लगता। मैं भी उसकी पैन्ट के ऊपर से उसके हथियार को दबा देती थी। 
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इसी तरह से एक महीना बीत गया और हमारी शादी हो गई।
शादी के बाद आखिर हमारे प्रथम मिलन की रात भी आ गई, हमने एक दूसरे से अनेक कसमें वादे किये। वो तो बस मुझे अपने आगोश में लेने को उतावला था। मेरे अन्‍दर की हया ने साहिल से कमरे की लाईट बन्‍द करने का अनुरोध किया।
जिसको ठुकराते हुए वो बोला- आख़िर मैं भी तो देखना चाहता हूँ कि मेरे चाँद की रोशनी कैसी है उस पर यह रोशनी पड़कर कैसे लगती है। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

अब साहिल मुझे पूरी नंगी करके मेरे मम्मों को दबा दबाकर उसकी घु्ंडियों को चूसने लगा। मैंने भी बिना शर्माये उसका लंड पकड़ लिया जो पूरे शवाब पर था और अपना जलवा दिखाने को पूरी तरह से तैयार था।
कुछ देर बाद वो बोला- सुनो मेरी प्राण प्रिय, अब मैं और तुम मिलकर एक जिस्म बन जायेंगे।
यह कहते हुए उसने अपनी तलवार को मेरी म्‍यान पर रख दिया और ज़ोर से अंदर डालने की कोशिश की। मगर म्यान का मुँह बहुत छोटा था और तलवार का मुँह बड़ा था मगर तलवार तो फिर तलवार ही होती है उसने जबरदस्‍ती उसे म्यान में डालने की कोशिश की आखिर में उसकी जबरदस्‍ती कामयाब हई और म्यान का मुँह फट गया खून बहने लगा और तलवार अंदर जाने लग गई। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

मैं मीठे मीठे दर्द से कराह रही थी। पर आज वो पूरे अधिकार से मुझ पर सवार था। उसने अपना हथियार पूरा अंदर करके मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया।। फिर उसका शरीर मेरे साथ घमासान करने लगा। थोड़ी मेहनत के बाद उसने अपना लावा मेरे अन्‍दर उड़ेल दिया। उसके गरम लावे की एक एक बूंद मेरे अन्‍दर अंग अंग तक ठंडक पहुंचा रही थी। आखिरी बूंद तक निचुड़ जाने के बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला और बाथरूम की तरफ दौड़ा।

हम दोनों से बाथरूम में जाकर एक दूसरे का अंग अंग अच्‍छी तरह धोकर साफ दिया और बिस्‍तर पर आकर फिर से एक दूसरे की बांहों में समा गये।
साहिल आज रात भर मेरा बैंड बजाने के मूड में था। सच यह था कि मेरा दिल भी चाहता था कि जिस चुदाई को मैं महीनों से तड़प रही थी उसकी सारी कसर साहिल आज ही पूरी कर दे। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

जिंदगी की गाड़ी यूँ ही चल रही थी। मेरा पति रोज ही मेरी चुदाई करता रहा मगर कोई बच्चा नहीं ठहरा।
आख़िर एक दिन मेरी सास ने मेरे पति से पूछ ही लिया- मुझे पोते या पोती का मुँह कब दिखाओगे?
यह सुनकर मुझे लगा कि कहीं ना कहीं किसी ना किसी में तो कोई कमी है। मैंने बिना पति से कहे अपनी जाँच एक डॉक्टर से करवाई तो पाया कि मैं मां नहीं बन सकती।

जब मैंने डॉक्टर से पूछा कि इसका कोई इलाज तो होगा?
उसने भी बिना कोई तसल्‍ली दिया मुझे साफ बता दिया कि मेरी बिमारी में इलाज भी सम्‍भव नहीं है।

मेरा दिल टूट गया। जब मैंने साहिल को ये बताया तो वो भी बहुत परेशान हुआ। कुछ दिनों बाद यह बात मेरी सास तक भी पहुँच गई। अब तो वो मेरे पति को मेरे विरुद्ध भड़काने लगी। यहां तक कि मुझे तलाक देने की भी सलाह दी गई। मैंने यह सुना तो मैंने साहिल से कहा- अगर तुम चाहो तो मुझे तलाक़ दे सकते हो, मैं उसमें कोई रोड़ा नहीं बनूँगी। हां, मुझे ये अफ़सोस होगा कि मैं तुमसे दूर हो जाऊंगी। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.
मेरे पति ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसकी चुप्पी मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। अब वो मेरे साथ रात को कुछ भी नहीं करता था। मैं भी कुछ नहीं बोल पाती। आख़िर मैंने ही फैसला कर लिया कि मैं अब इसके साथ नहीं रहूंगी और रोते रोते साहिल को अपनी बात कह दी।
मगर इसका भी उस पर कोई असर नहीं हुआ।

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साहिल ने चुपचाप अपनी बदली भी शहर की दूसरी शाखा में करवा ली। अब मुझसे सिवा घर पर मिलने के अलावा और कोई समय नहीं मिलता था और घर पर वो मुझसे कोई बात नहीं करते थे। दुखी होकर एक दिन मैं ही अपने पिता के घर वापस लौट आई। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

अभी मुझे पिता के घर आये कुछ ही दिन हुए थे कि मुझे पता लगा मेरी ननद जिसका एक 6 महीने का बच्चा भी था अपने पति के साथ किसी दुर्घटना में चल बसी।
उसकी आर्थिक दशा बहुत खराब थी। उसके ससुराल में भी कोई ऐसा नहीं था इस हादसे को सुनकर मेरा पति जल्दी से पहुँचा और ननद आदि के अन्तिम संस्‍कार के बाद उस बच्‍चे को अपने साथ अपने घर ही ले आया.

उस परिस्थिति को देखकर मैंने बड़ा दिल रखते हुए उस बच्‍चे को अपनाने का फैसला किया। मेरी सास जो कल तक मेरे खिलाफ थी उसका रो रो का बुरा हाल था, वो अपने किये पर शर्मिंदा थी। उसी दिन मैंने एक वकील को बुलाकर बच्‍चे को कानूनी रूप से गोद लेने की पूरी तैयारी कर ली। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.

अब मैंने आफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले ली और बच्‍चे की देखभाल में लग गई। अब मैं अपने पति से कोई खास बात भी नहीं करती थी। बल्कि अगर यह कहा जाए की एक ही छत के नीचे जैसे दो अंजान हस्तियाँ रहती हों, हम ऐसे ही रहते थे।

एक दिन शायद साहिल को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और वो मेरे आगे हाथ जोड़कर अपने किये की मांफी मांगने लगा।
यूं‍ तो साहिल के लिये मेरे मन में अब वो जगह नहीं थी पर न जाने को मैं साहिल के आंसू देख नहीं पाई, मेरी आंखों से भी आंसू छलकने लगे। मैंने सोचा कि एक बच्‍चे की कमी थी, वो ईश्‍वर ने पूरी कर दी। अब जीवन को खुशहाल जीना ही बेहतर होगा।

यह सोचकर मैंने साहिल का लंड जोर से पकड़कर दबाया और बोली- इसके बिना तुम्हें नहीं पता कि मेरी रातें कितनी मुश्किल से बीती हैं।
उसने एक हाथ को मेरे मम्मों और दूसरे को मेरी चूत पर रखकर हौले हौले सहलाते हुए अपने प्‍यार का इजहार किया। “Office Ke New Join Ladke Ke Saath Sex”.
मैंने कहा- साहिल, मैं तो कई दिनों से चाहती थी कि तुम्हारा हाथ इनको जोर जोर से दबाये और तुम्हारा लंड मेरी चूत की खुजली ठीक कर दे … मगर कहती भी तो कैसे?

साहिल ने उसी समय अपना लंड निकालकर मेरी चूत में डाला और मुझे जितनी भी जोर से चोद सकता था, चोदने लगा और बोला- अनुप्रिया, अब पूरी पिछली कसर निकालनी पड़ेगी।
उस रात उसने मुझे चार बार चोदकर मेरी चूत को खुश किया।

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